हनुमान जी का प्रिय प्रसाद और मंगलवार पूजा की गुप्त विधि

हनुमान जी को कौन सा प्रसाद सबसे प्रिय है? जानें मंगलवार की पूजा की गुप्त विधि

सनातन धर्म में हनुमान जी को संकटमोचन माना गया है। वे कलयुग के जाग्रत देव हैं जो अपने भक्तों की हर विपत्ति को तुरंत दूर करते हैं। मान्यता है कि मंगलवार के दिन बजरंगबली की विशेष पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट, रोग और दोष समाप्त हो जाते हैं।
यदि आप भी हनुमान जी को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो यह जानना बेहद जरूरी है कि उन्हें भोग में क्या पसंद है और उनकी पूजा की सही विधि क्या है। आइए जानते हैं हनुमान जी के प्रिय प्रसाद और मंगलवार की गुप्त पूजा विधि के बारे में।
हनुमान जी का प्रिय प्रसाद बूंदी के लड्डू और चूरमा
हनुमान जी का प्रिय प्रसाद और मंगलवार पूजा की गुप्त विधि

हनुमान जी के सबसे प्रिय प्रसाद

बजरंगबली को सात्विक और मीठा भोजन बेहद प्रिय है। मंगलवार के दिन उन्हें निम्नलिखित चीजों का भोग लगाने से वे अत्यंत प्रसन्न होते हैं:
  • बूंदी और बूंदी के लड्डू: हनुमान जी को संकटमोचन के रूप में बूंदी या बेसन के लड्डू सबसे ज्यादा प्रिय हैं। मंगलवार को इसका भोग लगाने से ग्रहों के अशुभ प्रभाव दूर होते हैं।
  • चूरमा: शुद्ध घी, गेहूं के आटे और गुड़ से बना चूरमा बजरंगबली का मुख्य भोग माना जाता है। इसका भोग लगाने से संतान सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
  • बेसन के लड्डू: बेसन के लड्डू चढ़ाने से गुरु और मंगल ग्रह मजबूत होते हैं, जिससे कार्यक्षेत्र में सफलता मिलती है।
  • पान का बीड़ा: हनुमान जी को पूजा के अंत में मीठा पान (बीड़ा) अर्पित करना अत्यंत शुभ होता है। इसमें कत्था, गुलकंद, सौंफ और खोपरा होना चाहिए। चूना और सुपारी का प्रयोग न करें। यह जीवन के सभी संकटों से मुक्ति दिलाता है।
  • केला और मौसमी फल: हनुमान जी को फलों में केला बहुत प्रिय है। मंगलवार को हमेशा जोड़े में (दो) केले अर्पित करने चाहिए।


मंगलवार की गुप्त पूजा विधि

हनुमान जी की कृपा पाने के लिए मंगलवार के दिन इस विशेष और गुप्त विधि से पूजा करें। इससे आपकी हर मनोकामना शीघ्र पूरी होगी।
1. सुबह की तैयारी और संकल्प
  • सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें।
  • लाल रंग के साफ वस्त्र धारण करें (मंगलवार को लाल रंग शुभ माना जाता है)।
  • अपने घर के मंदिर में पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
  • हाथ में जल लेकर अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए संकल्प लें।
2. पूजा स्थल और मूर्ति की स्थापना
  • एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर हनुमान जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
  • उनके साथ भगवान श्री राम और माता सीता के चित्र की भी पूजा अवश्य करें, क्योंकि राम जी के बिना हनुमान जी की पूजा अधूरी मानी जाती है।
3. अभिषेक और चोला अर्पण (विशेष विधि)
  • हनुमान जी को गंगाजल से स्नान कराएं।
  • यदि आपके पास हनुमान जी की धातु या पत्थर की मूर्ति है, तो चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर उन्हें चोला चढ़ाएं।
  • पूजा के दौरान सुचिता और मर्यादा का पूर्ण ध्यान रखना चाहिए। परंपरा के अनुसार पूर्ण पवित्रता के साथ ही मूर्ति का स्पर्श किया जाता है।
  • हनुमान जी को लाल रंग के पुष्प (विशेषकर गेंदा या गुलाब) और लाल चंदन का तिलक लगाएं।
4. दीपक और मंत्र जाप
  • हनुमान जी के सामने गाय के शुद्ध घी का या चमेली के तेल का दीपक जलाएं।
  • धूप-अगरबत्ती जलाकर वातावरण को पवित्र करें।
  • इसके बाद आसन पर बैठकर कम से कम 108 बार इस प्रभावशाली मंत्र का जाप करें: 
    "ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्" या "ॐ हं हनुमते नमः"

5. पाठ और आरती
  • मंत्र जाप के बाद हनुमान चालीसा, बजरंग बाण या सुंदरकांड का पाठ करें।
  • पाठ पूरा होने के बाद ऊपर बताए गए प्रिय प्रसादों (बूंदी, चूरमा या पान का बीड़ा) का भोग लगाएं।
  • अंत में कपूर जलाकर हनुमान जी की आरती करें और अनजाने में हुई भूलचुक के लिए क्षमा मांगें।


मंगलवार पूजा के नियम और सावधानियां

हनुमान जी की पूजा में शुद्धता और नियमों का पालन करना अनिवार्य है:
  • ब्रह्मचर्य का पालन: मंगलवार के दिन शारीरिक और मानसिक रूप से पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करें।
  • सात्विक भोजन: इस दिन मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन का सेवन भूलकर भी न करें।
  • क्रोध से बचें: पूजा के दिन किसी पर गुस्सा न करें और न ही किसी को अपशब्द बोलें।
  • नमक का त्याग: यदि संभव हो तो मंगलवार के व्रत में नमक का सेवन न करें। इसके स्थान पर मीठा भोजन या फलहार किया जा सकता है।
निष्कर्ष:
हनुमान जी केवल सच्चे भाव के भूखे हैं। यदि पूरी श्रद्धा, शुद्धता और सही विधि से उन्हें उनका प्रिय प्रसाद अर्पित किया जाए, तो बजरंगबली भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। इस मंगलवार से ही इस विधि को अपनाकर जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

|| जय बजरंगबली ||


Comments

Popular posts from this blog

महामृत्युंजय मंत्र का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व: नियम और सही समय

हनुमान अष्टक का पाठ क्यों है शक्तिशाली? जानें इसके चमत्कारिक लाभ

सुबह उठकर हथेलियों को क्यों देखना चाहिए? जानें करदर्शन मंत्र का महत्व