सांस्कृतिक पुनर्जागरण के पुरोधा: नरेंद्र मोदी और भव्य भारत की संकल्पना

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विभिन्न सांस्कृतिक पोशाकों में भारतीयों के साथ चल रहे हैं, पृष्ठभूमि में भव्य मंदिर और लहराता तिरंगा है।

21वीं सदी के भारत के इतिहास में एक ऐसा दौर चल रहा है, जिसे आने वाली पीढ़ियां 'सांस्कृतिक पुनरुत्थान का युग' कहेंगी। लंबे समय तक औपनिवेशिक मानसिकता और तुष्टिकरण की राजनीति के कारण भारत ने अपनी प्राचीन विरासत और सांस्कृतिक जड़ों को कहीं पीछे छोड़ दिया था। लेकिन साल 2014 के बाद देश के राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने न केवल आर्थिक और तकनीकी प्रगति की, बल्कि अपनी खोई हुई सांस्कृतिक पहचान को भी पूरी भव्यता के साथ पुनर्जीवित किया।
आज का भारत "विकास भी, विरासत भी" के मंत्र पर आगे बढ़ रहा है। आइए विस्तार से जानते हैं कि कैसे नरेंद्र मोदी भारतीय सांस्कृतिक पुनर्जागरण के पुरोधा बनकर उभरे हैं।

1. सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और 'भव्य भारत' का दृष्टिकोण
नरेंद्र मोदी का दृष्टिकोण केवल बुनियादी ढांचे के विकास (Infrastructure) तक सीमित नहीं है, बल्कि वे भारत को एक 'सांस्कृतिक महाशक्ति' (Cultural Superpower) के रूप में देखते हैं।
  • गुलामी की मानसिकता से मुक्ति: लाल किले की प्राचीर से पीएम मोदी ने 'पंच प्रण' का आह्वान किया, जिसमें गुलामी के हर अंश से मुक्ति और अपनी विरासत पर गर्व करना शामिल है।
  • सभ्यतागत गौरव की पुनर्स्थापना: भारत केवल 1947 में बना एक आधुनिक राष्ट्र नहीं है, बल्कि हजारों साल पुरानी एक जीवंत सभ्यता है। इस विचार को मुख्यधारा के विमर्श में लाना इस दौर की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

2. ऐतिहासिक प्रतीकों और आस्था के केंद्रों का कायाकल्प
बीते कुछ वर्षों में भारत के उन प्राचीन आस्था केंद्रों का जीर्णोद्धार किया गया है, जो सदियों से उपेक्षित थे या आक्रमणकारियों के आघात झेल रहे थे।
  • अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण: 500 वर्षों के लंबे संघर्ष और करोड़ों भारतीयों की आस्था के केंद्र प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर का निर्माण और प्राण-प्रतिष्ठा, आधुनिक भारत के इतिहास का सबसे बड़ा सांस्कृतिक मील का पत्थर है।
  • काशी विश्वनाथ धाम और उज्जैन महाकाल लोक: संकरी गलियों में सिमटे बाबा विश्वनाथ के दरबार को एक भव्य कॉरिडोर का रूप दिया गया। इसी तरह 'महाकाल लोक' ने अध्यात्म को आधुनिक प्रबंधन के साथ जोड़ा।
  • केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम का पुनर्निर्माण: आपदा के बाद केदारनाथ घाटी का पुनर्विकास और चारधाम ऑल-वेदर रोड परियोजना ने देश के सांस्कृतिक भूगोल को सुदृढ़ किया है।

3. वैश्विक पटल पर भारतीय संस्कृति का शंखनाद: 'सॉफ्ट पावर'
प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय संस्कृति की अनमोल धरोहरों को वैश्विक मंच पर स्थापित करने का अद्भुत काम किया है।
  • अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस: संयुक्त राष्ट्र (UN) में पीएम मोदी के प्रस्ताव के बाद 21 जून को पूरी दुनिया 'अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस' मनाती है। योग आज भारत की सबसे बड़ी 'सॉफ्ट पावर' बन चुका है।
  • आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सहयोग से जामनगर में 'ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन' की स्थापना की गई, जिसने आयुर्वेद को वैश्विक विज्ञान के रूप में मान्यता दिलाई।
  • चोरी हुई धरोहरों की वापसी: दशकों से विदेशों में तस्करी कर भेजी गईं भारत की सैकड़ों प्राचीन मूर्तियों और कलाकृतियों को पीएम मोदी के कूटनीतिक प्रयासों से वापस भारत लाया गया।

4. गुमनाम नायकों और जनजातीय संस्कृति का सम्मान
सांस्कृतिक पुनर्जागरण केवल धार्मिक स्थलों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें भारत के हर हिस्से की लोक-संस्कृति और इतिहास को समेटा गया है।
  • जनजातीय गौरव दिवस: भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को राष्ट्रीय स्तर पर मनाना और देश के स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समाज के योगदान को इतिहास की किताबों में सही स्थान देना इसका बड़ा उदाहरण है।
  • पूर्वोत्तर (North-East) का मुख्यधारा में आगमन: 'अष्टलक्ष्मी' के रूप में पूर्वोत्तर राज्यों की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान और त्योहारों (जैसे हॉर्नबिल फेस्टिवल) को देश-विदेश में प्रमोट किया गया।

5. आधुनिकता और सनातन का अनूठा संगम
इस सांस्कृतिक पुनर्जागरण की सबसे खूबसूरत बात यह है कि यह आधुनिकता के खिलाफ नहीं है। यह युवा पीढ़ी को जड़ों से जोड़ते हुए आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। डिजिटल इंडिया, स्पेस टेक्नोलॉजी और यूपीआई (UPI) की सफलता के साथ-साथ जब भारत का युवा माथे पर तिलक लगाकर केदारनाथ की रील्स बनाता है या अपनी लोक-भाषाओं पर गर्व करता है, तो 'भव्य भारत' की संकल्पना सच होती दिखाई देती है।
"सांस्कृतिक पुनर्जागरण के पुरोधा: नरेंद्र मोदी और भव्य भारत की संकल्पना" केवल एक राजनीतिक नारा नहीं है, बल्कि यह एक बदलते हुए भारत की हकीकत है। एक ऐसा भारत जो अपनी प्राचीन पहचान को छोड़े बिना आधुनिक दुनिया का नेतृत्व करने के लिए तैयार है। यह पुनरुत्थान आने वाली कई सदियों तक देश को आंतरिक रूप से मजबूत और एकजुट बनाए रखेगा।

यह भी पढ़ें:

Post a Comment

0 Comments