हनुमान चालीसा कैसे पढ़ें? हनुमान चालीसा पढ़ने की 3 गुप्त विधियां | बजरंगबली की कृपा |

हनुमान चालीसा पढ़ने की गुप्त विधि और नियम
हनुमान चालीसा कैसे पढ़ें?


 हनुमान चालीसा पढ़ने की 3 गुप्त विधियां: जिससे जागृत होती है बजरंगबली की असीम कृपा

हनुमान चालीसा का पाठ करोड़ों सनातनी रोज करते हैं। लेकिन क्या आपको मनचाहा फल मिल रहा है? कई बार साधारण तरीके से पाठ करने पर भी वह ऊर्जा महसूस नहीं होती, जिसकी आपको प्रतीक्षा है। तंत्र शास्त्र और सनातन परंपराओं में हनुमान चालीसा को सिद्ध करने और बजरंगबली की असीम कृपा पाने की 3 अत्यंत गोपनीय और चमत्कारी विधियां बताई गई हैं।
यदि आप इन गुप्त विधियों से पाठ करते हैं, तो आपकी चेतना जागृत होगी और संकटमोचन स्वयं आपके संकट हरने चले आएंगे।
1. घट संपुट विधि (संकट नाशक गुप्त तरीका)
यह विधि किसी विशेष संकट, गंभीर बीमारी या अदालती मामलों से मुक्ति पाने के लिए अचूक मानी जाती है। इसमें हनुमान चालीसा के दोहों और चौपाइयों को एक विशेष क्रम (संपुट) में बांधा जाता है।
  • विधि: चालीसा शुरू करने से पहले हनुमान जी के सामने तांबे के कलश में जल भरकर रखें।
  • गुप्त नियम: चालीसा की शुरुआत से पहले, मध्य में और अंत में "नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा" या अपनी समस्या से जुड़ी किसी एक चौपाई का 3 बार संपुट लगाएं।
  • समापन: पाठ पूरा होने के बाद उस कलश के जल को पूरे घर में छिड़कें और स्वयं प्रसाद के रूप में ग्रहण करें। यह जल अभिमंत्रित होकर औषधि बन जाता है।
2. रात्रि कालीन 'निशिता काल' साधना (मनोकामना पूर्ति विधि)
हनुमान जी रुद्र के अवतार हैं और रात्रि का समय (विशेषकर निशिता काल यानी रात 11:45 से 12:30 के बीच) साधना के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। इस समय की गई पूजा सीधे बजरंगबली तक पहुंचती है।
  • विधि: रात को स्वच्छ वस्त्र (लाल या पीले) पहनकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
  • गुप्त नियम: अपने सामने चमेली के तेल का दीपक जलाएं। लगातार 7 या 11 दिनों तक रोज रात को ठीक एक ही समय पर 7 बार हनुमान चालीसा का पाठ करें।
  • विशेष: इस साधना के दौरान पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करें और भूमि पर शयन करें। यह विधि सोई हुई किस्मत को जगाने की क्षमता रखती है।
3. श्वास-मानसिक जप विधि (आध्यात्मिक जागृति और मानसिक शांति)
यह विधि उन लोगों के लिए है जो हनुमान जी का साक्षात अनुभव करना चाहते हैं और अपनी मानसिक शक्ति को बढ़ाना चाहते हैं। इसमें चालीसा को बोलकर नहीं, बल्कि मौन रहकर पढ़ा जाता है।
  • विधि: सिद्धासन या सुखासन में बैठ जाएं। अपनी आंखें बंद करें और ध्यान को दोनों भौंहों के बीच (आज्ञा चक्र) पर केंद्रित करें।
  • गुप्त नियम: अपनी आती-जाती श्वास के साथ हनुमान चालीसा की एक-एक चौपाई को मन ही मन दोहराएं। जब आप श्वास अंदर लें तो चौपाई का पहला भाग, और जब श्वास बाहर छोड़ें तो दूसरा भाग मानसिक रूप से पढ़ें।
  • लाभ: इस विधि से शरीर के चक्र जागृत होते हैं और साधक के चारों ओर एक ऐसा सुरक्षा कवच बनता है जिसे कोई भी नकारात्मक शक्ति भेद नहीं सकती।
इन गुप्त विधियों के महा-नियम
  • दिशा: सदैव पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
  • आसन: केवल ऊनी या कुशा (घास) के आसन का प्रयोग करें। जमीन पर सीधे न बैठें।
  • संकल्प: पहले दिन हाथ में जल और अक्षत (चावल) लेकर अपनी मनोकामना का संकल्प जरूर लें।
इन 3 गुप्त विधियों में से किसी भी एक विधि को पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ अपनाकर देखें। बजरंगबली की कृपा आपके जीवन के हर अंधकार को मिटा देगी। जय श्री राम, जय हनुमान!
‖ जय श्री राम ‖

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